निर्मला

Nirmala - Munshi Premchand

160

महिला-केन्‍द्रित साहित्‍य के इतिहास में इस उपन्‍यास का विशेष स्‍थान है। इस उपन्‍यास की मुख्‍य पात्र 15 वर्षीय सुन्‍दर और सुशील लड़की है। निर्मला नाम की लड़की का विवाह एक अधेड़ उम्र के व्‍यक्‍ति से कर दिया जाता है जिसके पूर्व पत्‍नी से तीन बेटे हैं...

"निर्मला का प्रेमचन्‍द के उपन्‍यासों की कड़ी में महत्त्‍वपूर्ण स्‍थान है। इसकी कथा के केन्‍द्र में निर्मला है, जिसके चारों ओर कथा-भवन का निर्माण करते हुए असम्‍बद्ध प्रसंगों का पूर्णत: बहिष्‍कार किया गया है। इससे यह उपन्‍यास सेवासदन से भी अधिक सुग्रंथित एवं सुसंगठित बन गया है। इसे प्रेमचन्‍द का प्रथम ‘यथार्थवादी’ तथा हिन्‍दी का प्रथम ‘मनोवैज्ञानिक उपन्‍यास’ कहा जा सकता है। निर्मला का एक वैशिष्‍ट्य यह भी है कि इसमें ‘प्रचारक प्रेमचन्‍द’ के लोप ने इसे न केवल कलात्‍मक बना दिया है, बल्‍कि प्रेमचन्‍द के शिल्‍प का एक विकास-चिह्न भी बन गया है।" — डॉ. कमल किशोर गोयनका, प्रेमचन्‍द के उपन्‍यासों का शिल्‍प-विधान।

Author

प्रेमचन्द (1880-1936) की गिनती हिन्दी साहित्य के महान् और लोकप्रिय लेखकों में की जाती है । उनका जन्म बनारस (वाराणसी) के पास लम्ही गांव में हुआ और प्रारम्भिक शिक्षा वहीं एक मदरसे में प्राप्त की ।

हिन्दी और उर्दू साहित्य में प्रेमचन्द को आज एक पथ-प्रदर्शक के रूप में जाना जाता है। उन्होंने अपनी रचनाओं में समाज की कुरीतियों एवं विषमताओं पर गहरा प्रहार किया और साथ ही इन्हीं ज्वलंत समस्याओं को लेकर प्रगतिशील दृष्टिकोण का परिचय भी दिया। उनकी अनेक रचनाओं की गणना कालजयी साहित्य के अन्तर्गत की जाती है।

Book Details

ISBN: 9788122204957 | Format: Paperback | Language: Hindi | Extent:  160 pp